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शहीदों के वारिसों को योग्य होने पर नौकरियाँ देने का भरोसा

शहीदों के वारिसों को योग्य होने पर नौकरियाँ देने का भरोसा
चंडीगढ़, 14 फरवरी:
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की हिदायतों पर रक्षा सेनाएं कल्याण विभाग पुलवामा हमले के चार शहीदों को वित्तीय सहायता मुहैया करवा चुका है जिन्होंने पिछले साल इसी दिन देश की एकता और अखंडता की रक्षा करते हुये लामिसाल बलिदान दे दिया था।
यह प्रगटावा करते हुये रक्षा सेवाएं कल्याण विभाग के डायरैक्टर ब्रिगेडियर सतीन्द्र सिंह (सेवामुक्त) ने बताया कि शहीदों के पारिवारिक सदस्यों को पंजाब सरकार की नीति के मुताबिक वित्तीय सहायता /सरकारी नौकरी मुहैया करवाई जा चुकी है।
डायरैक्टर ने बताया कि जि़ला तरन तारन से शहीद कांस्टेबल सुखजिन्दर सिंह और जि़ला मोगा से हैड कांस्टेबल जैमल सिंह की विधवाओंं को क्रमवार 10-10 लाख रुपए की वित्तीय सहायता के अलावा शहीदों के माँ-बाप को दो-दो लाख रुपए की सहायता दी गई है। दोनों परिवारों को भरोसा दिया गया कि जिस समय पर इन शहीदों के छोटे बच्चे बड़े हो जाएंगे तो उनको सरकारी नौकरी दी जायेगी।
जि़ला गुरदासपुर से शहीद कांस्टेबल मनिन्दर सिंह केस में उसके माँ-बाप को 10 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है क्योंकि उसका विवाह नहीं हुआ था। उसका भाई जो पहले सी.आर.पी.एफ. में था और अब इस्तीफ़ा दे चुका है, को जल्द ही पंजाब पुलिस में नौकरी दी जायेगी।
इसी तरह रूपनगर जि़ले से शहीद कांस्टेबल कुलविन्दर सिंह के माँ बाप को भी 10 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है क्योंकि उसका भी विवाह नहीं था । वह माँ बाप का अकेला पुत्र होने के कारण उसके अगले वारिस को नौकरी भी नहीं दी जा सकती। इसके अलावा उसके माँ बाप के लिए 10,000 रुपए महीना पैंशन तय की गई है। उसके माँ बाप की निजी विनती पर राज्य सरकार ने शहीद के जद्दी गाँव से मुख्य मार्ग तक सडक़ चौड़ी करने के लिए 2 करोड़ रुपए को पहले ही मंजूरी दे दी हुई है। इसके अलावा उसके माँ बाप की इच्छा के मुताबिक गाँव में पार्क बनाने के लिए 2.5 लाख रुपए भी मंज़ूर किये जा चुके हैं। इसके अलावा उसके माँ बाप की इच्छा पर सरकारी हाई स्कूल और सरकारी प्राईमरी स्कूल के लिए 1.30 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है।
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सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, पंजाब
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा एमरजैंसी के पहले 24 घंटों के दौरान कोई मुफ़्त सेवाएं न होने सम्बन्धी जारी पत्र को तुरंत वापस लेने के आदेश
चंडीगढ़, 14 फरवरी:
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू ने डायरैक्टोरेट स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा जि़लों को जारी पत्र जिसमें सरकारी अस्पतालों में एमरजैंसी मैडीकल ट्रीटमेंट के लिए पहले 24 घंटों के दौरान कोई मुफ़्त सेवाएं न होने पर 1 से 5 साल तक की बच्चियों के लिए भी मुफ़्त इलाज की सुविधा न होने संबंधी कहा गया है, को तुरंत वापस लेने के आदेश दिए हैं।
यहाँ जारी एक प्रैस बयान में इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि उक्त पत्र अनजाने में पी.एन.डी.टी. डिवीजऩ द्वारा सरकार की किसी मंज़ूरी के बिना जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि यह मामला उनके ध्यान में लाया गया और उन्होंने इस पत्र को तुरंत रद्द करने के आदेश दिए हैं।
स. बलबीर सिंह सिद्धू ने दोहराया कि सरकारी अस्पतालों में एमरजैंसी के पहले 24 घंटों के दौरान और 1-5 साल तक की लडक़ी के लिए मुफ़्त इलाज की सुविधा दी जा रही है और यह सेवाएं पहले की तरह ही लोगों के लिए मुफ़्त रहेंगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने आगे बताया कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य भर में मानक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। इसीलिए मुख्यमंत्री ने सरबत सेहत बीमा योजना शुरू की है जिसके अधीन राज्य की तकरीबन 2.2 करोड़ आबादी को कवर किया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रमुख स्कीम भी राज्य के लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है।
इस स्कीम के अधीन दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं संबंधी जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री ने बताया कि सरबत सेहत बीमा योजना के अंतर्गत पहले ही 1,54,513 मरीज़ मुफ़्त इलाज का लाभ ले चुके हैं और उनके इलाज पर 176.75 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इस योजना संबंधी और जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 41,36,980 ई-कार्ड जनरेट किये गए हैं और राज्य भर के 692 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने बताया कि इस स्कीम के अंतर्गत अब तक तकरीबन 2,860 दिल के ऑपरेशन, 4,557 जोड़ों के ऑपरेशन, 2,564 कैंसर ट्रीटमेंट और 28,342 डायलेसिस किये जा चुके हैं।
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