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Friday, May 20, 2022

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भारत हमेशा से एक शांतिप्रिय देश रहा है जो अपने इतिहास में कभी भी किसी अन्य क्षेत्र के लोगों के प्रति आक्रामक नहीं रहा है।

माननीय राज्यपाल पंजाब और प्रशासक, यूटी चंडीगढ़

श्री बनवारीलाल पुरोहित

द्वारा

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देवियो और सज्जनों

आप सभी को मेरी ओर से संध्याकालीन अभिवादन!

जैसा कि हम 1971 के भारत-पाक युद्ध की स्वर्ण जयंती की यात्रा शुरू करने जा रहे हैं, हमारे पास सैन्य साहित्य महोत्सव के 5वें संस्करण द्वारा इतिहास की भव्यता, 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सैनिकों की शौर्य गाथा और वीरता को एक बार फिर से जीवंत करने का एक शानदार अवसर है!

लेकिन, इससे पहले कि मैं और कुछ कहूं, मैं आप सभी का थोड़ा सा कीमती समय लेकर 8 दिसंबर को दुर्भाग्यपूर्ण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जान गंवाने वाले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, ट्राइसिटी के अपने ब्रिगेडियर एल.एस. लिद्दड़ व अन्य सभी हमारे वीर सैनिकों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहता हूं और उनकी आत्माओं की शांति के लिए ईष्वर से प्रार्थना करता हूं! देश उनके शानदार योगदान को कभी नहीं भूलेगा।

यह सैन्य साहित्य महोत्सव पंजाब सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और भारतीय सेना की पश्चिमी कमान द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। यह महोत्सव आम तौर पर लोगों और विशेष रूप से युवाओं को हमारे सशस्त्र बलों द्वारा लड़े गए युद्धों संबंधी ज्ञान प्राप्त करने, महान सैनिकों के अनुभवों से प्रेरित होने और उनके देशभक्ति के उत्साह को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करेगा।

हमारे लिए अपने सैन्य इतिहास से सीखना बहुत महत्वपूर्ण है। यह आत्म-सुधार की एक कुंजी है। यह हमें जानकारी प्रदान करता है कि उन दिनों हमारे महान सैनिकों ने अपने मिशन को कैसे पूरा किया। श्री राजनाथ सिंह जी ने रक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने के तुरंत बाद देश के सीमावर्ती इतिहास संबंधी लेखन कार्य को आगे बढ़ाने के लिए एक समिति का गठन किया। समय-समय पर समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का प्रकाशन और मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल जैसे कार्यक्रमों का आयोजन लोगों और विशेषज्ञों के बीच सैन्य इतिहास व ज्ञान के अंतर को कम करता है। यह भारत के नागरिकों और युवाओं को देश के सशस्त्र बलों, उनके अनुशासन, संस्कृति, उनके बलिदान और विविधता में एकता के अनूठे उदाहरण संबंधी परिचित करने का एक शानदार तरीका है।

हम सभी जानते हैं कि भारत हमेशा से एक शांतिप्रिय देश रहा है जो अपने इतिहास में कभी भी किसी अन्य क्षेत्र के लोगों के प्रति आक्रामक नहीं रहा है। जैसा कि माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, ‘‘भारत ने कभी किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया बल्कि अन्य देशों के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। हमारा देश कभी किसी और की जमीन का भूखा नहीं रहा। हमने कभी किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया। वास्तव में, भारत ने दूसरे देशों के लिए लड़ाई लड़ी है। देष ने दो विश्व युद्धों के दौरान अन्य देशों के लिए 1.5 लाख से अधिक कीमती जानों की आहुति दी है।”

साथ ही यह भी पूर्ण रूप से स्पष्ट है कि भारत भले ही विश्व शांति का पुजारी है और इसने दुनिया के किसी भी देश के प्रति कभी भी आक्रामक रूख नहीं अपनया है, लेकिन हम उन लोगों को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं जो हमारे प्रति आक्रामकता दिखाते हैं।

‘‘अहिंसा परमो धर्म’’ लेकिन अहिंसा का पालन करने की हमारी प्रतिबद्धता को हमारी कमज़ोरी नहीं समझा जा सकता। किसी भी विदेशी ‘‘आक्रामकता’’ या ‘‘टकराव’’ को हमारी ओर से हमेशा करारा जवाब ही मिलेगा। अशांति पैदा करने के लिए अनगिनत नापाक प्रयास किए गए हैं लेकिन हर बार आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब मिला है।

वर्तमान में, देश अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मना रहा है। यह स्वतंत्रता हमने लंबे समय की गुलामी के दौरान असंख्य बलिदान देकर प्राप्त की है। इस आजादी की रक्षा करना हम सबका दायित्व है। स्वतंत्रता के इस पवित्र दौर में हमारे सामने नए लक्ष्य, नए संकल्प और नई चुनौतियाँ हैं।

अब हम रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। रक्षा बजट का करीब 65 फीसदी अब देश में ही निर्मित रक्षा उपकरणों पर खर्च किया जा रहा है। यह आत्म निर्भर भारत का संकल्प है। आज हमारे देश में अर्जुन टैंक और तेजस जैसे अत्याधुनिक हल्के लड़ाकू विमान बन रहे हैं। हाल ही में, सात नई रक्षा कंपनियों को भी राष्ट्र को समर्पित किया गया है

हमारे लिए राष्ट्र की रक्षा का अर्थ है इस राष्ट्रीय जीवन शक्ति, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा करना! हमारी सेनाओं में अपार शौर्य है और साथ ही उनके हृदय में मानवता और करुणा भी है। इसलिए हमारी सेनाएं सिर्फ सरहदों पर ही शौर्य नहीं दिखातीं बल्कि आपदाओं, बीमारियों और महामारियों के दौरान जब भी देश को उनकी जरूरत होती है, वे वहां मौजूद रहते हैं। आज देश की यह अटूट मान्यता है कि भारत की सेनाएं वहां पहुंच सकती हैं जहां कोई नहीं पहुंच पाता। प्रत्येक भारतीय के मन में एक ऐसी सहज भावना मौजूद है कि जब वह भारतीय सेना को देखते हैं तो उन्हें अपनी सुरक्षा की कोई चिंता नहीं रहती और वह अपने आप को सुरक्षित अनुभव करते हैं और यह कोई छोटी बात नहीं है। मुझे विश्वास है कि अपने सशस्त्र बलों की वीरता से प्रेरणा लेकर हम अपने भारत को ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

सैन्य साहित्य महोत्सव अपने आप में अनूठा है और यहां के लोग भी, और इसीलिए यह चंडीगढ़ को इस क्षेत्र का एक ख़ास केंद्र बनाता है जहां इस प्रकार के महोत्सव आयोजित किये जाते हैं।

जैसा कि मुझे ज्ञात है, यह सैन्य साहित्य महोत्सव युद्ध गाथाओं, बहादुरी और साहस की व्यक्तिगत कहानियों से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के समकालीन विषयों पर प्रमुख विचारकों और विशेषज्ञों द्वारा पैनल चर्चाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करेगा। इसके कार्यक्रमों को इस तरह से नियोजित किया गया है जिससे कि समाज के सभी वर्गों के सभी समूहों के लोगों में इसके प्रति रुचि पैदा हो सके।

हालांकि इस वर्ष महामारी से उत्पन्न खतरे के कारण विभिन्न गतिविधियों को वर्चुअल रूप से करवाया जा रहा है, लेकिन इस बार भी इस महोत्सव दौरान ध्यान विषेष तौर पर सैन्य आयोजनों पर ही केंद्रित रहेगा।

इस वर्ष हम 1971 के भारत-पाक युद्ध की शानदार जीत की स्वर्ण जयंती भी मना रहे हैं और यह महोत्सव उसी विषय पर है। यह भारतीय सैनिकों की महान बहादुरी और बलिदान का सम्मान करने और उसे स्मरण करने के साथ-साथ समकालीन सैन्य, सुरक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों संबंधी विचार-विमर्श करने के लिए एक साझा मंच पर विशेषज्ञों को लाने का अवसर भी है।

मैं भारत की अदम्य भावना और राष्ट्र की सुरक्षा में पंजाब के लोगों के बेमिसाल योगदान को प्रदर्शित करने वाले इस महोत्सव के आयोजन के लिए लेफ्टिनेंट जनरल टीएस शेरगिल के नेतृत्व में सैन्य साहित्य महोत्सव की टीम को बधाई देता हूं।

युवा पीढ़ी को हमारी गौरवशाली सैन्य विरासत और सेना के अनूठे शौर्य से परिचित कराने हेतु इस महोत्सव का सार्थक आयोजन किया जाना एक प्रशंसनीय कदम है।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस महोत्सव को वर्चुअल तौर पर बड़ी संख्या में दर्शकों का समर्थन मिलेगा और इन आयोजनों को उनके द्वारा पसंद किया जाएगा।

मुझे चंडीगढ़ में सैन्य साहित्य महोत्सव 2021 के आयोजन की बहुत खुशी है, और मैं इसकी सफलता की कामना करता हूं।

धन्यवाद,

जय हिन्द।

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