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चिट्टे से भी खतरनाक है मसक्कली गेम..हंसते खेलते परिवारों को खा गई यह गेम…राजपुरा चंडीगढ़ के आसपास है इस गेम का बोलबाला

चिट्टे से भी खतरनाक है मसक्कली गेम
हंसते खेलते परिवारों को खा गई यह गेम

पंजाब और हरियाणा में भले ही सरकारों ने नशा तस्करों के खिलाफ अभियान चला रखा है और किस हद तक कामयाबी भी मिल रही है नौजवान युवा पीढ़ी जो नशे की दलदल में फंसी हुई है उन्हें निकालने के लिए सरकार हर तरीका अपना रही है लेकिन आपको बता दें कि इन सब से भी ऊपर है गैंबलिंग की दुनिया में मसक्कली गेम का नाम जो चिट्टे नशे के साथ-साथ बड़े से बड़े नशे से भी खतरनाक है पता नहीं कितने ही परिवारों को यह गेम खा गई है और पानी तक मांगने नहीं देती लेकिन आपको बता दें कि जो इस गेम को अपने गुमनाम अड्डा पर जुआरियों को यह गेम खेलने की इजाजत देते हैं बस सारे का सारा पैसा आखिर में खुद ही लेकर जाते हैं और खेलने वाला यहां से सिर्फ अपने कपड़े ही झाड़ कर जाता है लेकिन यह गेम खेलने वाला इन लोगों के अड्डे से कुछ भी नहीं लेकर जाता आपको बता दें कि इस गेम में 12 घर होते हैं जैसे ताश के 12 पत्तों में 6 लाल रंग के चुन लिए जाते हैं और 6 काले रंग के चुन लिए जाते हैं आपने देखा होगा आज से काफी समय पहले स्कूलों के बाहर और बाजारों में लॉटरी बेचने वाले फिरा करते थे और उस समय 10 पैसे से लेकर एक रुपए तक की लाटरी हुआ करती थी कैलेंडर टाइप पर छोटी-छोटी टिकट् चिपकाए होती थी एक टिकट खोलकर जब पर्ची खोलते थे उसमें से कोई ना कोई इनाम जरूर आता था इसके बाद कुछ जुआरियों ने पुरानी तर्ज पर इस मसक्कली गेम को अंजाम दिया इस गेम को प्रफुल्लित करने में राजपुरा चंडीगढ़ के आसपास के लोगों का नाम आता है जो इस गेम के विधाता माने जाते हैं खेलने वाला 12 घरों पर अपनी किस्मत आजमाने के लिए अलग-अलग घरों पर पैसे लगाता है उसे ₹100 लगाने के बाद ₹900 मिलते हैं और अखर लगाने पर ₹700 मिलते हैं जबकि कंप्यूटर लाटरी में यह रकम काफी नीचे आ जाती है मसक्कली गेम खेलते खेलते इंसान इस कदर अपने होश गवा बैठता है और उसे लगता है कि मैं जीत ता जा रहा हूं लेकिन अंत उसका हार से ही अंत होता है इन 12 घरों में से खेलने वाले व्यक्ति को लगता है कि मैं जीत रहा हूं जबकि असल में हार रहा होता है और आखिर में यहां से कोई भी मां का लाल जीत कर नहीं जाता सारी की सारी रकम जुआ अड्डे के मालको को
ही देकर जाता है काफी जुआरियों से हमारी बात हुई है उन्होंने अपना नाम छुपाते हुए अपनी सारी कहानी बताइ और इस गेम से पर्दा उठाया भले ही पुलिस प्रशासन ने खुले में चलने वाली जुए की गेमो को बंद करवा दिया है और इससे जुए बाज काफी परेशान भी हैं हो भी क्यों ना क्यों के इस गेम से भी कोई कमाई कम नहीं होती क्योंकि मसक्कली गेम आम आदमी के बस की बात नहीं हमने संगरूर पटियाला और कई शहरों में से इस गेम के बारे में पता लगाना चाहा लेकिन जुआरियों ने एक ही जवाब दिया कि जनाब यह गेम आम आदमी के बस की बात नहीं और यह पटियाला मैं नहीं राजपुरा से शुरू होता है इस गेम का खेल चंडीगढ़ तक आप कहीं भी जा सकते हैं तो अब जरूरत है जैसे सरकारों ने चिट्टे और बाकी नशों के खिलाफ अभियान चला रखा है वैसे ही यह गेम जो 12 पत्तों से शुरू होती है इसका अंत करना भी बहुत जरूरी है तब कहीं जाकर परिवारों में उनके सदस्यों को आराम से दो वक्त का खाना मिल पाएगा और वह चैन की नींद सो पाएंगे आपको बता दें किस गेम के लिए कोई ज्यादा खुले मैदानों की जरूरत नहीं यह लोग चोरी छिपे बंद मकानों कोठियां जहां कोई नहीं जाता वहां पर लोगों को रोजाना ही जगह बदल बदल कर बुलाते हैं और लाखों रुपया उनसे लूट कर उनको खाली हाथ घरों को भेज देते हैं इसीलिए यह लोग पुलिस के हाथ नहीं लगते जरूरत है पुलिस को राजपुरा चंडीगढ़ आसपास के इलाकों में इन लोगों पर छापामारी करने की और इस मस्कली गेम का अंत करने की इस गेम के विधाता का नाम भी बड़े आसानी से पुलिस को मिल सकता है थोड़ी सी मेहनत जरूरत है बाकी हम भी कोशिश कर रहे हैं जल्द ही इन लोगों तक पहुंचने की क्योंकि उन्होंने पूरी तरह से चौकसी का जाल बिछा रखा है नए आदमी का तो उन तक पहुंचना बहुत ही मुश्किल है हम कोशिश कर रहे हैं इन लोगों तक पहुंचने की

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