` यह कोई श्मशान घाट का दृश्य नहीं है और ना ही कोई ऐसा त्यौहार जिस में आग जलाकर लोग उसके बीच बैठकर या पूजा करते हैं.. – Azad Tv News
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यह कोई श्मशान घाट का दृश्य नहीं है और ना ही कोई ऐसा त्यौहार जिस में आग जलाकर लोग उसके बीच बैठकर या पूजा करते हैं..

जिला संगरूर के   सब डिवीजन भवानीगढ़ के गांव बालद कला में एक योगी बाबा मानवता की भलाई और इलाके में खुशहाली शांति के लिए 40 दिन की तपस्या पर बैठे हैं तपस्या भी ऐसी कि आम व्यक्ति उसके बारे में सोच ही नहीं सकता यह बाबा पूरी गर्मी में अपने चारों ओर आग जलाकर उसके बीच रोजाना 2 घंटे बैठकर तपस्या करते हैं आज के आधुनिक दौर में यह बेशक किसी के गले ना उतरे लेकिन बहुत से लोगों का मानना है कि आस्था नाम की चीज भी दुनिया में है और उसी के चलते वह बाबा के द्वारा की जा रही तपस्या से सहमत हैं

जो दृश्य आप देख रहे हैं  यह दृश्य है गांव बालद कला  का    जिला संगरूर के  सब डिवीजन भवानीगढ़ में पड़ता है यहां पर यह बाबा 40 दिन के लिए एक बेहद कठिन तपस्या कर रहे हैं जिसमें वह 40 दिन रोजाना 2 घंटे दोपहर को अपनी चारों ओर उपलों की आग जलाकर उसके बीच बैठकर तपस्या करेंगे उनका कहना है कि वह यह सब मानवता की भलाई खास तौर पर इलाके के लोगों की खुशहाली समृद्धि और उनकी तंदुरुस्ती के लिए सब कर रहे हैं जब उनसे इस संवाददाता ने यह पूछा कि आप यह क्यों कर रहे हो क्या आपने कोई केमिकल तो नहीं लगा रखा जिससे आग की तपिश का आपके ऊपर असर ना हो तो बाबा भड़क गए और कहा कि तुम 15 मिनट यहां बैठ कर देखो फिर तुम्हें पता चलेगा कि हम तपस्या कर रहे हैं या कोई ढोंग अगर हमारी बात झूठी हुई तो तुम्हारे कैमरे वगैरह में आग में फेंक दूंगा और फिर तुमको पता चलेगा कि आग नकली है या असली आज के आधुनिक दौर में इस बात के ऊपर आसानी से विश्वास नहीं होता और बहुत से लोगों के यह बात गले नहीं उतरेगी कि यह बाबा ऐसा क्यों कर रहे हैं और इसका कोई फायदा है ही नहीं लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो बाबा के द्वारा की जा रही समस्या को सही मानते हैं और इस को ढूंढता अपने क्या कहते हैं जिसमें साधु महात्मा पूरी गर्मी के दिनों में भगवान की तपस्या के बीच बैठकर करते हैं और भगवान से यह दुआ करते हैं यह प्रार्थना करते हैं कि उनके इलाके में सुख शांति बनी रहे और लोगों पर कोई कुदरती आपदा ना आए बहार आस्था और आधुनिकता के बीच में बाबा के द्वारा की जा रही है तपस्या लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है एक और जहां लोग इसके बारे में विश्वास नहीं कर रहे वही बहुत से लोगों का कहना है कि बाबा बिल्कुल सही कर रहे हैं और लंबे समय से ऐसी परंपरा चली आ रही है

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