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दिल्ली के हवा प्रदूषण के लिए केजरीवाल दिल्ली में मौजूद कारणों की तरफ ध्यान दें: सोनी

पंजाब में पराली फूँकने का प्रभाव चण्डीगढ़ पर तो हुआ नहीं, दिल्ली में कैसे हो गया?; पंजाब के मेहनती किसानों को दोष देना ग़लत
चंडीगढ़, 2 नवम्बर:
पंजाब के वातावरण मंत्री श्री ओ.पी.सोनी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल के उस बयान, जिसमें उन्होंने पंजाब में पराली को लगाई जाती आग को दिल्ली के हवा प्रदूषण के गिर रहे मानक के लिए जि़म्मेदार ठहराया था, को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि श्री केजरीवाल को इस हवा प्रदूषण के लिए दिल्ली में मौजूद कारणों पर गहराई से ध्यान देना चाहिए, न कि वैज्ञानिक तर्क से वंचित राजनैतिक बयान देकर पंजाब के मेहनती किसानों को दोष देना चाहिए।
श्री सोनी ने इस बारे विस्तार में जाते हुए बताया कि पूरे अक्तूबर महीने में पंजाब के हवा गुणवत्ता सूचक अंक (ए.कयू.आई.) ने औसतन कभी भी 170 की संख्या पार नहीं की परन्तु दिल्ली की हवा की गुणवत्ता पिछले महीने कभी भी 350 से कम नहीं आई। श्री सोनी ने कहा कि पिछले दिनों के दौरान हवा की गति 1.5 किलोमीटर प्रति घंटा और हवा की दिशा दक्षिण -पूर्व की तरफ से आकर उत्तर -पश्चिम की तरफ जा रही थी, न कि दिल्ली की तरफ तो फिर कैसे पंजाब का प्रदूषण सारा हरियाणा पार करके पंजाब की हद से 250 किलोमीटर दूर दिल्ली पहुँच सकता है? वातावरण मंत्री ने कहा कि अगर पराली फूँकने का प्रभाव दिल्ली के वातावरण पर पड़ सकता है तो इसका प्रभाव चंडीगढ़ की आबो -हवा पर क्यों नहीं हुआ। चंडीगढ़ का वातावरण बिल्कुल साफ़ है। श्री केजरीवाल ने इस प्रदूषण के लिए हरियाणा को क्लीन चिट देकर इससे राजनैतिक लाभ लेने की भद्दी कोशिश की है, जबकि दिल्ली के आस -पास हरियाणा और यू.पी. के खेतों में पराली को लगाई जाती आग को अनदेखा करके दिल्ली के लोगों के साथ बेइन्साफ़ी की है।
श्री सोनी ने आगे बताया कि पंजाब में कुल 65 लाख एकड़ में धान की फ़सल लगाई जाती है और अब तक कुल 21000 आग लगाने की घटनाएँ सामने आईं हैं, जो औसतन 330 घटनाएँ प्रति एक लाख एकड़ बनतीं हैं, जिस कारण इस साल पंजाब की आबो -हवा की गुणवत्ता में कोई गुणात्मक गिरावट रिकार्ड नहीं की गई। उन्होंने आगे बताया कि अगर प्रति गाँव भी यह आंकड़े निकाले जाएँ तो पंजाब के कुल 12700 गाँवों में से प्रति गाँव औसतन दो से भी कम आग लगाने की घटनाएँ दिखाई देती हैं। फिर भी पता नहीं क्यों केजरीवाल साहब पंजाब के मेहनती किसानों, जिन्होंने सरकार की सलाह मानते हुए पराली न फूँकने का उद्यम किया और जिस कारण आग लगाने की घटनाएँ भी पिछले साल की अपेक्षा 35 प्रतिशत घटीं हैं, को बिना किसी वैज्ञानिक दलील से जि़म्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्होंने इस प्राप्ति के लिए पंजाब के किसानों को बधाई देते हुए कहा कि पिछले साल के औसतन हवा गुणवत्ता सूचक अंक 275 के मुकाबले इस साल 170 की संख्या भी पार न करना पंजाब के उद्यमी और वैज्ञानिक खोजों के अनुपालक किसानों की वजह से है, जिसका सबूत इस वर्ष की आबो -हवा का साफ़ रहना है।
वातावरण मंत्री ने श्री केजरीवाल को सलाह दी कि वह अपनी जि़म्मेदारी से न भागेें, बल्कि ग्रीन ट्रिब्यूनल की तरफ से वर्धमान कौशिक केस में दिल्ली के हवा प्रदूषण के लिए जि़म्मेदार कारणों की गहरी जाँच पड़ताल करके इन पर काबू पाएं जिससे दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

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